‘हबासपुरी वीविंग’ का आधिकारिक पोस्टर जारी, लुप्त होती ओडिशा की हथकरघा परंपरा को वैश्विक मंच पर लाने की कोशिश

भुवनेश्वर, 13/8 : ओडिशा की समृद्ध और विविध हथकरघा परंपराओं को संरक्षित करने तथा उन्हें देश-दुनिया के सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर बहुप्रतीक्षित ओडिया डॉक्यूमेंट्री ‘हबासपुरी वीविंग: द सेकेंड एंड लास्ट डेथ???’ का आधिकारिक पोस्टर जारी किया गया। रितुप्रिया प्रोडक्शंस ने बीएनआर फिल्म्स और एमएनएम एंटरटेनमेंट के सहयोग से इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया है। फिल्म का निर्माण पुरस्कार विजेता फिल्मकार अतिश कुमार राउत ने किया है, जबकि इसका निर्देशन चर्चित निर्देशक बिस्वनाथ रथ और मयूर महापात्र ने किया है।

डॉक्यूमेंट्री ओडिशा के कालाहांडी जिले की प्रसिद्ध लेकिन संकटग्रस्त हबासपुरी हथकरघा परंपरा की कहानी को सामने लाती है। फिल्म में इस पारंपरिक बुनाई कला के इतिहास, इसकी वर्तमान स्थिति, बुनकरों के सामने मौजूद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों तथा इसके पुनर्जीवन की संभावनाओं को केंद्र में रखा गया है। तेजी से बदलते औद्योगिक और सामाजिक परिवेश के बीच हबासपुरी हथकरघा परंपरा के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को फिल्म के माध्यम से दस्तावेजी रूप में दर्ज करने का प्रयास किया गया है। ‘हबासपुरी वीविंग’ को बिस्वनाथ रथ की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘कोटपाड़ वीविंग: द स्टोरी ऑफ ए रेस अगेंस्ट टाइम’ की वैचारिक अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दूरदर्शन और पीएसबीटी के लिए निर्मित उनकी पिछली डॉक्यूमेंट्री को 60 पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं और इसे 11 देशों में प्रदर्शित किया गया था। इस फिल्म ने कोटपाड़ की पारंपरिक हथकरघा कला और वहां के बुनकर समुदाय की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

‘हबासपुरी वीविंग’ के जरिए बिस्वनाथ रथ ने ओडिशा के बुनकरों और कारीगरों के जीवन तथा उनकी पारंपरिक कला के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया है। इस परियोजना में उनके साथ निर्देशक मयूर महापात्र और निर्माता अतिश कुमार राउत जुड़े हैं। फिल्म को लेकर निर्माण टीम का उद्देश्य केवल हबासपुरी बुनाई की खूबसूरती को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि इसके सामने मौजूद संकट और इसके संरक्षण के लिए संभावित रास्तों पर भी चर्चा करना है। डॉक्यूमेंट्री को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रारंभिक पहचान मिल चुकी है। वर्ष 2023 में आयोजित एनएफडीसी फिल्म बाजार डॉक्यूमेंट्री को-प्रोडक्शन मार्केट में 98 अंतरराष्ट्रीय प्रविष्टियों में से इस परियोजना को अंतिम 12 डॉक्यूमेंट्री परियोजना प्रस्तावों में स्थान मिला था। इसके अलावा फिल्म का पहला लुक पोस्टर 77वें कान फिल्म महोत्सव में जारी किया गया था। कान के मंच पर ओडिशा की हथकरघा विरासत को प्रस्तुत किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

फिल्म के लिए शोध कार्य कई चरणों में वर्ष 2019 से 2024 के बीच किया गया। प्रारंभिक शोध अगस्त 2019 में फिल्मकार बिस्वनाथ रथ, वस्त्र डिजाइनर अनुप्रिया मृधा और अमेरिका स्थित पुस्तकालय निदेशक कोरिन फ्लेहर्टी ने शुरू किया था। कोविड-19 महामारी के कारण शोध कार्य कुछ समय के लिए बाधित हुआ। इसके बाद अगस्त 2023 में शोध को दोबारा शुरू किया गया। इस चरण में मयूर महापात्र, सिद्धांत स्वरूप और देबाशीष प्रतिहारी ने बिस्वनाथ रथ के मार्गदर्शन में शोध कार्य में योगदान दिया। निर्माण टीम के अनुसार, कई वर्षों तक किए गए इस विस्तृत शोध ने फिल्म को तथ्यात्मक आधार और गहराई प्रदान की है। फिल्म की सह-निर्माता सुप्रिया राउत हैं। इसकी रचनात्मक टीम में सिद्धांत स्वरूप मुख्य सहायक निर्देशक, देबाशीष प्रतिहारी सहायक निर्देशक, मयूर महापात्र छायांकन निर्देशक और दिलेश्वर प्रधान ध्वनि डिजाइनर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। फिल्म के संपादन और डीआई का कार्य अजित नारायण दाश ने किया है, जबकि पृष्ठभूमि संगीत की रचना चर्चित संगीतकार प्रियब्रत पाणिग्राही कर रहे हैं। निर्माण टीम के अनुसार, ‘हबासपुरी वीविंग’ को भारत और विदेशों के विभिन्न फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया जाएगा। फिल्म समारोहों के बाद इसे टेलीविजन, ओटीटी और डिजिटल मंचों पर आम दर्शकों के लिए जारी करने की योजना है। बीएनआर फिल्म्स फिल्म की अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह रणनीति और डिजिटल वितरण की जिम्मेदारी संभालेगी। इस तरह फिल्म को केवल ओडिशा या भारत तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

निर्माता अतिश कुमार राउत ने कहा कि ओडिया मध्यम लंबाई की फिक्शन फिल्म ‘चारीकांधा’ की सफलता के बाद बिस्वनाथ रथ के साथ यह उनका दूसरा महत्वपूर्ण सहयोग है। उन्होंने कहा कि कालाहांडी क्षेत्र की एक विशिष्ट और लगभग विलुप्ति की ओर बढ़ रही हथकरघा परंपरा के पुनर्जीवन से जुड़े इस प्रकल्प का हिस्सा बनना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि रितुप्रिया प्रोडक्शंस की मूल सोच स्थानीय कहानियों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की रही है और इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए ओडिशा तथा भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।

निर्देशक बिस्वनाथ रथ ने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू हुई यह डॉक्यूमेंट्री उनकी टीम के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत परियोजना रही है। उन्होंने कहा कि हबासपुरी हथकरघा परंपरा बेहद खूबसूरत होने के बावजूद व्यापक स्तर पर लोगों के बीच कम जानी जाती है। इस कला को संरक्षण, पहचान और सम्मान की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म के माध्यम से हबासपुरी हथकरघा परंपरा को लेकर सार्थक जागरूकता पैदा होगी और इसके पुनर्जीवन तथा दीर्घकालिक संरक्षण के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

निर्देशक मयूर महापात्र ने कहा कि पोस्टर की दृश्य पहचान को दर्शकों से मिली तत्काल प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। उन्होंने कहा कि फिल्म ओडिशा के ऐसे बुनकर क्षेत्र की कहानी सामने लाती है, जिसे समय के साथ भुलाया जा रहा है। तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण, आर्थिक सहयोग की कमी और बदलते सामाजिक परिवेश ने हबासपुरी बुनकरों की पारंपरिक कला के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। फिल्म इन परिस्थितियों को करीब से देखने और समझने का प्रयास करती है।

निर्माण संस्थाओं के अनुसार, ‘हबासपुरी वीविंग: द सेकेंड एंड लास्ट डेथ???’ का आधिकारिक पोस्टर जारी होना केवल एक फिल्म के प्रचार की शुरुआत नहीं, बल्कि ओडिशा की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और हथकरघा विरासत को संरक्षित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। फिल्म के माध्यम से हबासपुरी बुनाई की कलात्मक विशेषताओं के साथ-साथ उन बुनकरों की वास्तविक जिंदगी और संघर्षों को भी सामने लाया जाएगा, जिनकी पीढ़ियां इस परंपरा को जीवित रखने में लगी रही हैं।

रितुप्रिया प्रोडक्शंस की स्थापना निर्माता अतिश कुमार राउत ने की है। यह संस्था ‘चारीकांधा’, ‘भौंरी’, ‘दालचीनी’, ‘प्रतिबाद’ और वर्ष 2024 की चर्चित ओडिया फिल्म ‘वोट’ जैसी सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जानी जाती है। बिस्वनाथ रथ द्वारा स्थापित बीएनआर फिल्म्स पिछले एक दशक से अधिक समय से ओडिशा और भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में करती रही है। निर्माण संस्था की विभिन्न परियोजनाओं को 640 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान मिलने का दावा किया गया है। वहीं मयूर महापात्र के नेतृत्व वाली एमएनएम एंटरटेनमेंट अपनी विशिष्ट सिनेमाई दृष्टि और ‘बैदा’ जैसी चर्चित फिल्मों के लिए पहचान रखती है।

हबासपुरी हथकरघा परंपरा को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह डॉक्यूमेंट्री एक ओर ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही पारंपरिक बुनाई कला और उससे जुड़े कारीगरों के भविष्य पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर पोस्टर जारी होने के साथ ही इस परियोजना ने ओडिशा की हथकरघा विरासत को लेकर एक नई चर्चा की शुरुआत कर दी है।

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